पर्वत, पठार और मैदान
पृथ्वी के प्राथमिक उच्चावचों के भू-आकृति विज्ञान को समझें। वलित, ब्लॉक और ज्वालामुखी पर्वतों का वर्गीकरण, खनिज समृद्ध पठारों का आर्थिक महत्व और विभिन्न मैदानी संरचनाओं का विवरण।
1. पर्वत: वर्गीकरण और प्रमुख श्रेणियां
पर्वत अपने आस-पास के धरातल से अचानक ऊंचे उठे हुए स्थल रूप होते हैं। उत्पत्ति के आधार पर इन्हें चार मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
A. वलित पर्वत (Fold Mountains)
विवर्तनिकी प्लेटों के आपस में टकराने से उत्पन्न संपीड़न बलों द्वारा धरातल में पड़ने वाले मोड़ों (वलनों) से बनते हैं।
- नवीन वलित पर्वत: तीव्र ढाल, नुकीले शिखर और गहरी घाटियाँ इनकी विशेषता हैं। उदाहरण: हिमालय (एशिया), आल्प्स (यूरोप), रॉकीज (उत्तरी अमेरिका), एंडीज (दक्षिणी अमेरिका)।
- प्राचीन वलित पर्वत: इनका निर्माण करोड़ों वर्ष पूर्व हुआ था और अपरदन के कारण ये अब कम ऊंचाई और गोलाकार शिखरों वाले रह गए हैं। उदाहरण: अरावली (भारत - विश्व की सबसे पुरानी वलित श्रृंखला), यूराल (रूस), अप्पलाचियन (यूएसए)।
B. ब्लॉक पर्वत (भ्रंशोत्थ पर्वत - Horst & Graben)
धरातल में खिंचाव या संपीड़न के कारण पड़े भ्रंशों (दरारों) से जब बीच का भाग ऊपर उठ जाता है या अगल-बगल के भाग नीचे धंस जाते हैं।
- ऊपर उठे हुए हिस्से को हॉर्स्ट (Horst) या ब्लॉक पर्वत कहते हैं, और नीचे धंसे हुए भाग को ग्राबेन (Graben) या भ्रंश घाटी कहते हैं।
- उदाहरण: जर्मनी का ब्लैक फॉरेस्ट और फ्रांस का वॉस्जेस पर्वत (बीच में राइन भ्रंश घाटी); पाकिस्तान की साल्ट रेंज; भारत में नर्मदा घाटी के किनारे स्थित विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाएं; यूएसए का सिएरा नेवादा (विश्व का सबसे बड़ा ब्लॉक पर्वत)।
C. ज्वालामुखी पर्वत
ज्वालामुखी उद्गार के दौरान निकलने वाले लावे, राख और मलबे के ठंडे होकर जमा होने से बनते हैं।
- उदाहरण: माउंट फुजी (जापान), माउंट किलिमंजारो (तंजानिया), माउंट कोटोपैक्सी (इक्वाडोर), माउंट वेसुवियस (इटली), माउंट पोपा (म्यांमार)।
D. अवशिष्ट / Relict पर्वत
पुराने पर्वतों या पठारों के बाह्य अपरदनकारी कारकों (नदी, पवन) द्वारा लंबे समय तक अपरदित होने के बाद बचे कठोर चट्टानी भाग हैं।
- उदाहरण: भारत में अरावली, नीलगिरि, पारसनाथ, राजमहल की पहाड़ियाँ और पश्चिमी व पूर्वी घाट; यूएसए में कैट्सकिल पर्वत।
2. पठार: प्रकार और आर्थिक महत्व
पठार ऊपर से सपाट और किनारों से तीव्र ढाल वाले विस्तृत मेजनुमा स्थल रूप होते हैं, जो भूपटल के लगभग 33% भाग को कवर करते हैं।
A. पठारों का वर्गीकरण
- अंतर-पर्वतीय पठार: चारों ओर से पर्वतों से घिरे सर्वाधिक ऊंचे पठार। उदाहरण: तिब्बत का पठार (विश्व का सबसे बड़ा और ऊंचा पठार, ~4500 मी), अनातोलिया का पठार (तुर्की), बोलीविया का पठार (एंडीज पर्वतमाला के बीच)।
- गिरिपद पठार (Piedmont): एक तरफ पर्वत और दूसरी तरफ मैदान या समुद्र से घिरे पठार। उदाहरण: पैटागोनिया का पठार (अर्जेंटीना), पीडमोंट पठार (यूएसए)।
- महाद्वीपीय पठार: पर्वतों से दूर स्थित विस्तृत पठार जो मैदानों से अचानक ऊंचे उठते हैं। उदाहरण: दक्कन का पठार (भारत), कनाडाई शील्ड।
- लावा पठार (Volcanic): शांत दरारी ज्वालामुखी उद्गार के लावे के जमाव से बनते हैं। उदाहरण: दक्कन ट्रैप (काली मिट्टी का क्षेत्र), कोलंबिया-स्नेक पठार (यूएसए)।
B. प्रमुख वैश्विक पठार और खनिज संपदा
पठार विभिन्न मूल्यवान खनिजों के भंडार होते हैं, जिस कारण इनका अत्यधिक आर्थिक महत्व है:
| पठार का नाम |
अवस्थिति |
प्रमुख खनिज भंडार |
परीक्षा उपयोगी तथ्य |
| छोटा नागपुर पठार |
पूर्वी भारत (झारखंड/पश्चिम बंगाल) |
कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट |
खनिजों की प्रचुरता के कारण इसे 'भारत का रूर' कहा जाता है। |
| कटंगा पठार |
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (अफ्रीका) |
तांबा, कोबाल्ट, यूरेनियम |
बैटरी निर्माण में उपयोगी कोबाल्ट का दुनिया का सबसे बड़ा स्रोत। |
| किम्बरले पठार |
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया |
हीरा, सोना, लौह अयस्क |
यहाँ प्रसिद्ध आर्गिल हीरे की खदान स्थित है (गुलाबी हीरों के लिए प्रसिद्ध)। |
| कनाडाई शील्ड (लॉरेंटियन) |
कनाडा |
निकल, तांबा, लोहा, सोना |
विश्व के सबसे पुराने भूगर्भीय शील्ड क्षेत्रों में से एक। |
| पोटवार पठार |
पाकिस्तान |
सेंधा नमक, पेट्रोलियम, चूना पत्थर |
साल्ट रेंज ब्लॉक पर्वतों के उत्तर में स्थित है। |
| लोएस पठार |
उत्तरी चीन |
अत्यंत उपजाऊ महीन मिट्टी (Loess) |
गोबी मरुस्थल से उड़कर आई पीली धूल के निक्षेप से बना है। |
3. मैदान: संरचनात्मक, अपरदनात्मक और निक्षेपण प्रकार
मैदान समतल या बहुत कम ढाल वाले निचले भूभाग होते हैं। उत्पत्ति के आधार पर इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:
A. संरचनात्मक मैदान
समुद्री नितल या महाद्वीपीय मग्नतट के ऊपर उठने (भू-उत्थान) से या चट्टानों की क्षैतिज परतों से बनते हैं।
- उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका का ग्रेट प्लेन्स, रूसी प्लेटफॉर्म, ऑस्ट्रेलिया का मध्यवर्ती मैदान।
B. अपरदनात्मक मैदान (पेनीप्लेन और पेडीप्लेन)
बाह्य अपरदनकारी शक्तियों द्वारा पर्वतों या पठारों को काटकर उन्हें समतल करने से बनते हैं।
- पेनीप्लेन (समप्राय मैदान): आर्द्र जलवायु में नदियों के दीर्घकालिक अपरदन से बनते हैं। इनमें बची हुई प्रतिरोधी चट्टानों की पहाड़ियों को मोनाडनॉक (Monadnock) कहते हैं।
- पेडीप्लेन (पाद मैदान): शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वायु अपरदन और ढाल निवर्तन से बनते हैं। बची हुई पहाड़ियों को इन्सेलबर्ग (Inselberg) कहते हैं।
C. निक्षेपात्मक मैदान
नदियों, हवा, हिमनद या झीलों द्वारा बहाकर लाए गए अवसादों के जमाव से बनते हैं।
- जलोढ़ / बाढ़ के मैदान: नदियों के निक्षेपण से बनते हैं। जैसे गंगा-यमुना का मैदान।
- *भाबर:* शिवालिक के गिरिपद में कंकड़-पत्थरों से बनी छिद्रयुक्त पट्टी जहाँ नदियाँ भूमिगत हो जाती हैं।
- *तराई:* भाबर के आगे का दलदली और नम क्षेत्र जहाँ नदियाँ पुनः धरातल पर प्रकट होती हैं; यह सघन वनों से युक्त है।
- *बांगर:* पुराना जलोढ़ क्षेत्र, जो बाढ़ की पहुंच से दूर होता है; इसमें कंकड़ पाए जाते हैं।
- *खादर:* नवीन जलोढ़ मिट्टी वाला क्षेत्र, जहाँ हर साल बाढ़ का नया पानी पहुंचता है; यह अत्यंत उपजाऊ होता है।
- लोएस मैदान: हवा द्वारा उड़ाकर लाई गई बारीक धूल (धूल-कणों) के जमाव से बनते हैं। जैसे उत्तरी चीन का मैदान।
- सरोवरीय मैदान (Lacustrine): झीलों में गाद जमा होने और उनके सूखने से बनते हैं। जैसे कश्मीर की घाटी और मणिपुर का इम्फाल बेसिन।
भूगर्भीय पर्वत निर्माण काल (Orogenies)
- 57 करोड़ वर्ष पूर्व — प्री-कैम्ब्रियन काल: सबसे पुराना पर्वत निर्माण चरण। इससे भारत में अरावली जैसी अवशिष्ट पर्वत श्रृंखलाओं का निर्माण हुआ।
- 40 करोड़ वर्ष पूर्व — कैलेडोनियन काल: सिलूरियन-डेवोनियन युग। इससे उत्तरी अमेरिका के अप्पलाचियन पर्वत और स्कॉटिश हाइलैंड्स का निर्माण हुआ।
- 30 करोड़ वर्ष पूर्व — हर्सिनियन काल: परमोकार्बोनिफेरस युग। यूरेशिया में यूराल पर्वत, ब्रिटेन के पेनाइंस और मध्य एशिया के तियान शान का निर्माण हुआ।
- 6 करोड़ वर्ष पूर्व से वर्तमान — अल्पाइन काल: टर्शियरी युग। इसके तहत दुनिया के सबसे ऊंचे नवीन वलित पर्वत: हिमालय, एंडीज, रॉकीज, आल्प्स और काकेशस बने।
Key Questions & Answers
- हॉर्स्ट (Horst) और ग्राबेन (Graben) में क्या अंतर है?
- भ्रंशन के कारण ऊपर उठे हुए ब्लॉक को हॉर्स्ट (ब्लॉक पर्वत) कहते हैं, जबकि नीचे धंसे हुए खंड को ग्राबेन (भ्रंश घाटी) कहा जाता है।
- भारत के किस पठार को 'भारत का रूर' (Ruhr of India) कहा जाता है?
- छोटा नागपुर पठार को। कोयला, लोहा और अभ्रक जैसे खनिजों की प्रचुरता के कारण इसे जर्मनी के रूर औद्योगिक क्षेत्र के सादृश्य माना जाता है।
- लोएस (Loess) मैदान क्या हैं और इनका निर्माण कैसे होता है?
- हवा द्वारा उड़ाकर लाई गई बारीक धूल और मिट्टी के जमाव से बने पीले रंग के अत्यंत उपजाऊ मैदान (जैसे उत्तरी चीन का लोएस मैदान)।
- पेनीप्लेन (Peneplain) और पेडीप्लेन (Pediplain) में क्या अंतर है?
- आर्द्र क्षेत्रों में नदियों के अपरदन से बनी समतल भूमि पेनीप्लेन (डेविस) कहलाती है, जबकि शुष्क क्षेत्रों में पवन अपरदन से निर्मित मैदान पेडीप्लेन (किंग) कहलाता है।
Memory Aids
- स्मृति सूत्र 1: प्रमुख नवीन वलित पर्वत (Young Fold Mountains): अल्पाइन युग में निर्मित नवीन वलित पर्वत: • U — यूराल (Urals - अल्पाइन और हर्सिनियन मिश्रित) • R — रॉकीज (Rockies - उत्तरी अमेरिका) • A — एंडीज (Andes - दक्षिणी अमेरिका) • A — आल्प्स (Alps - यूरोप) • H — हिमालय (Himalayas - एशिया) • M — एटलस (Atlas - अफ्रीका)
- स्मृति सूत्र 2: ब्लॉक पर्वत और भ्रंश घाटी: विवर्तनिकी ब्लॉक के सिद्धांत: • Horst (हॉर्स्ट) — ऊपर उठा हुआ खंड (ब्लॉक पर्वत बनाता है)। • Graben (ग्राबेन) — नीचे धंसा हुआ खंड (भ्रंश घाटी बनाता है)।
- स्मृति सूत्र 3: अंतर-पर्वतीय पठार (Intermontane Plateaus): चारों ओर से पर्वतों से घिरे पठार: • T — तिब्बत (हिमालय और कुनलुन के बीच) • A — अनातोलिया (तुर्की, पोंटिक और टॉरस के बीच) • C — कोलोराडो (यूएसए, रॉकीज के बीच) • B — बोलीवियन पठार (एंडीज के बीच)
Common Exam Traps
- भ्रम 1: यूराल पर्वत को नवीन वलित पर्वत समझना। यूराल पर्वत वलित पर्वत तो है, लेकिन यह प्राचीन वलित पर्वत है, जिसका निर्माण हर्सिनियन काल (30 करोड़ वर्ष पूर्व) में हुआ था।
- भ्रम 2: दक्कन के पठार को अंतर-पर्वतीय पठार समझना। दक्कन का पठार एक लावा/ज्वालामुखीय पठार है, यह तिब्बत की तरह चारों ओर से ऊंचे वलित पर्वतों से घिरा अंतर-पर्वतीय पठार नहीं है।
- भ्रम 3: ब्लैक फॉरेस्ट और वॉस्जेस की अवस्थिति में भ्रमित होना। जर्मनी में स्थित ब्लैक फॉरेस्ट और फ्रांस में स्थित वॉस्जेस (Vosges) दोनों ब्लॉक पर्वत हैं, जिनके बीच से राइन भ्रंश घाटी गुजरती है।
- भ्रम 4: सभी मैदानों को केवल नदियों द्वारा निर्मित मानना। मैदान संरचनात्मक (भू-उत्थान), अपरदनात्मक (हिमानी/कार्स्ट मैदान) या पवन-निक्षेपित (लोएस मैदान) भी हो सकते हैं।