संविधान सभा
भारत की संविधान सभा के इतिहास, गठन, प्रमुख समितियों और महत्वपूर्ण चर्चाओं का अन्वेषण करें जिसने विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार किया।
1. उत्पत्ति और गठन
संविधान सभा की मांग पहली बार आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) द्वारा 1935 में रखी गई थी, हालांकि इसका विचार 1934 में एम.एन. रॉय द्वारा दिया गया था। इसे ब्रिटिश सरकार ने 1940 के 'अगस्त प्रस्ताव' में सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया। अंततः, कैबिनेट मिशन योजना के तहत नवंबर 1946 में इसका गठन किया गया।
देश के विभाजन के बाद, सदस्यों की संख्या घटकर 299 रह गई, जिनमें से 229 ब्रिटिश भारतीय प्रांतों से और 70 देशी रियासतों से थे। ब्रिटिश भारत को दी गई 296 सीटों के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को 208 और मुस्लिम लीग को 73 सीटें मिलीं।
2. सभा की कार्यप्रणाली और उद्देश्य प्रस्ताव
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई। इसमें केवल 211 सदस्यों ने भाग लिया। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष और एच.सी. मुखर्जी तथा वी.टी. कृष्णमाचारी को उपाध्यक्ष चुना गया।
उद्देश्य प्रस्ताव:
13 दिसंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव ने संवैधानिक संरचना के मूल सिद्धांतों और दर्शन को रखा। इसे 22 जनवरी, 1947 को सर्वसम्मति से अपनाया गया। मुख्य सिद्धांतों में शामिल थे:
- भारत एक स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य होगा।
- प्रांतों को स्वायत्तता और अवशिष्ट शक्तियां दी जाएंगी।
- समस्त शक्ति और अधिकार जनता से प्राप्त होंगे।
- अल्पसंख्यकों, जनजातीय क्षेत्रों और पिछड़े वर्गों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
इस प्रस्ताव ने आगे चलकर हमारे संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार तैयार किया।
3. प्रमुख समितियां और प्रारूप समिति
संविधान निर्माण के विभिन्न कार्यों के लिए संविधान सभा ने कई समितियां बनाईं। इनमें से 8 प्रमुख समितियां थीं:
| समिति का नाम |
अध्यक्ष |
| प्रारूप समिति (Drafting Committee) |
डॉ. बी.आर. अंबेडकर |
| संघ शक्ति समिति |
जवाहरलाल नेहरू |
| संघ संविधान समिति |
जवाहरलाल नेहरू |
| प्रांतीय संविधान समिति |
सरदार वल्लभभाई पटेल |
| मूल अधिकारों, अल्पसंख्यकों आदि पर सलाहकार समिति |
सरदार वल्लभभाई पटेल |
| प्रक्रिया नियम समिति |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| राज्यों के लिए समिति (समझौता समिति) |
जवाहरलाल नेहरू |
| कार्य संचालन समिति (Steering Committee) |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
प्रारूप समिति (Drafting Committee): 29 अगस्त, 1947 को गठित की गई इस समिति को संविधान का प्रारूप तैयार करने का काम सौंपा गया था। इसने 141 बैठकें कीं और अपना कार्य 6 महीने से भी कम समय में पूरा किया।
4. अधिनियमन और प्रवर्तन
संविधान को पूरा करने में सभा को 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे। प्रारूप को 26 नवंबर, 1949 को अपनाने से पहले तीन बार पढ़ा गया।
अंगीकरण के समय संविधान में एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं।
संविधान का प्रवर्तन (Enforcement):
- कुछ प्रावधान (नागरिकता, चुनाव, अंतरिम संसद आदि) तुरंत 26 नवंबर, 1949 से लागू हो गए।
- संविधान का मुख्य हिस्सा 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। इस दिन को विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह 1930 की पूर्ण स्वराज घोषणा की 20वीं वर्षगांठ थी।
संविधान सभा का कालानुक्रमिक विकास
- मई 1946 — कैबिनेट मिशन प्रस्ताव: ब्रिटिश कैबिनेट मिशन ने संविधान सभा के गठन की योजना प्रस्तावित की, जिसमें इसके सदस्यों की संख्या और चुनाव पद्धति को रेखांकित किया गया।
- 9 दिसंबर, 1946 — प्रथम ऐतिहासिक बैठक: संविधान सभा पहली बार मिली। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया।
- 13 दिसंबर, 1946 — उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution): जवाहरलाल नेहरू ने ऐतिहासिक 'उद्देश्य प्रस्ताव' पेश किया, जिसमें भावी संविधान के आदर्शों और सिद्धांतों को रेखांकित किया गया था।
- 29 अगस्त, 1947 — प्रारूप समिति की नियुक्ति: डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए 7 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
- 26 नवंबर, 1949 — संविधान का अंगीकरण: सभा ने अपना कार्य पूरा किया और संविधान को अपनाया। 284 सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए। इसे संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
Key Questions & Answers
- संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार कौन थे?
- **सर बी.एन. राव** को संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।
- संविधान सभा में कुल कितनी महिला सदस्य शामिल थीं?
- संविधान सभा में **15 महिलाएं** शामिल थीं (जैसे सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी, राजकुमारी अमृत कौर)।
- संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष कौन थे?
- **डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा**, सबसे बुजुर्ग सदस्य को चुनने की फ्रांसीसी प्रथा का पालन करते हुए।
- 26 जनवरी 1950 के बाद किस निकाय ने भारत की अंतरिम संसद के रूप में कार्य किया?
- **संविधान सभा** स्वयं 1951-52 में आम चुनाव होने तक भारत की अंतरिम/अस्थायी संसद में बदल गई थी।
Memory Aids
- स्मृति सूत्र 1: प्रारूप समिति के सदस्य (7 सदस्य): प्रारूप समिति के 7 सदस्यों को याद करें: 1. **Ambedkar** — डॉ. बी.आर. अंबेडकर (अध्यक्ष) 2. **Madhav** — एन. माधव राव (बी.एल. मित्तर की जगह ली) 3. **Munshi** — के.एम. मुंशी 4. **Saadullah** — सैयद मोहम्मद सादुल्ला 5. **Khaitan** — डी.पी. खेतान (मृत्यु के बाद टी.टी. कृष्णमाचारी आए) 6. **Gopal** — एन. गोपालस्वामी आयंगर 7. **Krishna** — अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर
- स्मृति सूत्र 2: नेहरू की अध्यक्षता वाली समितियां: जवाहरलाल नेहरू इन तीन प्रमुख समितियों के अध्यक्ष थे: • **U** — संघ शक्ति समिति (Union Powers Committee) • **U** — संघ संविधान समिति (Union Constitution Committee) • **S** — राज्यों से वार्ता के लिए समिति (States Committee)
- स्मृति सूत्र 3: पटेल की अध्यक्षता वाली समितियां: सरदार वल्लभभाई पटेल अध्यक्ष थे: • **P** — प्रांतीय संविधान समिति (Provincial Constitution Committee) • **A** — मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों पर सलाहकार समिति (Advisory Committee)
Common Exam Traps
- भ्रम 1: यह मानना कि संविधान सभा को भारत की जनता द्वारा सीधे चुना गया था। वास्तव में, यह प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुनी गई थी।
- भ्रम 2: संविधान सभा के अध्यक्ष (डॉ. राजेंद्र प्रसाद) को प्रारूप समिति के अध्यक्ष (डॉ. बी.आर. अंबेडकर) के साथ भ्रमित करना।
- भ्रम 3: यह सोचना कि सभा शुरुआत से ही एक संप्रभु निकाय थी। यह केवल 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के बाद पूरी तरह संप्रभु बन पाई।
- भ्रम 4: यह मानना कि महात्मा गांधी संविधान सभा के सदस्य थे। न तो महात्मा गांधी और न ही मोहम्मद अली जिन्ना संविधान सभा के सदस्य थे।