UPSSSC लोअर मेन्स के लिए विलोम की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए विलोम की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| शब्दशब्द | विलोमविलोम | शब्दशब्द | विलोमविलोम |
|---|---|---|---|
| अल्पज्ञ | बहुज्ञ | अग्रज | अनुज |
| अतिवृष्टि | अनावृष्टि | आकाश | पाताल |
| आगमन | प्रस्थान | आस्तिक | नास्तिक |
| उत्कर्ष | अपकर्ष | उदार | अनुदार |
जो शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं।जो शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं।
अ- उपसर्ग जोड़कर: सत्य-असत्य, चल-अचल।अ- उपसर्ग जोड़कर: सत्य-असत्य, चल-अचल।
अन- उपसर्ग जोड़कर: अनुज्ञा-अननुज्ञा, आगत-अनागत।अन- उपसर्ग जोड़कर: अनुज्ञा-अननुज्ञा, आगत-अनागत।
राजा-रानी, भाई-बहन, वर-वधू, पिता-माता, पति-पत्नी, नर-नारी।राजा-रानी, भाई-बहन, वर-वधू, पिता-माता, पति-पत्नी, नर-नारी।
अमृत-विष, अंधकार-प्रकाश, अल्प-अति, अर्वाचीन-प्राचीन, इहलोक-परलोक, उत्तम-अधम, कुटिल-सरल, कृपण-दानी, गहरा-उथला, घृणा-प्रेम, जड़-चेतन, तुच्छ-महान, दीर्घ-ह्रस्व, नूतन-पुरातन, परतंत्र-स्वतंत्र, प्रत्यक्ष-परोक्ष, बंधन-मुक्ति, मूक-वाचाल, यश-अपयश, रक्षक-भक्षक।अमृत-विष, अंधकार-प्रकाश, अल्प-अति, अर्वाचीन-प्राचीन, इहलोक-परलोक, उत्तम-अधम, कुटिल-सरल, कृपण-दानी, गहरा-उथला, घृणा-प्रेम, जड़-चेतन, तुच्छ-महान, दीर्घ-ह्रस्व, नूतन-पुरातन, परतंत्र-स्वतंत्र, प्रत्यक्ष-परोक्ष, बंधन-मुक्ति, मूक-वाचाल, यश-अपयश, रक्षक-भक्षक।
विस्तार-संक्षेप, सजीव-निर्जीव, सगुण-निर्गुण, साक्षर-निरक्षर, सुलभ-दुर्लभ, हिंसा-अहिंसा, क्षम्य-अक्षम्य, ज्ञानी-अज्ञानी, ठोस-तरल, दाता-याचक, निंदा-स्तुति, निरामिष-सामिष, पक्ष-विपक्ष, पूर्ण-अपूर्ण, बद्ध-मुक्त, भद्र-अभद्र, मान-अपमान, योगी-भोगी, विधवा-सधवा, शुष्क-आर्द्र।विस्तार-संक्षेप, सजीव-निर्जीव, सगुण-निर्गुण, साक्षर-निरक्षर, सुलभ-दुर्लभ, हिंसा-अहिंसा, क्षम्य-अक्षम्य, ज्ञानी-अज्ञानी, ठोस-तरल, दाता-याचक, निंदा-स्तुति, निरामिष-सामिष, पक्ष-विपक्ष, पूर्ण-अपूर्ण, बद्ध-मुक्त, भद्र-अभद्र, मान-अपमान, योगी-भोगी, विधवा-सधवा, शुष्क-आर्द्र।
सक्रिय-निष्क्रिय, सकाम-निष्काम, सुमति-कुमति, सुदिन-दुर्दिन, स्थूल-सूक्ष्म, आदि-अंत, आकर्षण-विकर्षण, आस्था-अनास्था, इष्ट-अनिष्ट, एकाधिकार-सर्वाधिकार, ओजस्वी-निस्तेज, कर्कश-मधुर, खगोल-भूगोल, गमन-आगमन, गौरव-लाघव, चंचल-स्थिर, छली-निष्कपट, जय-पराजय, तप्त-शीतल, दयालु-निर्दयी।सक्रिय-निष्क्रिय, सकाम-निष्काम, सुमति-कुमति, सुदिन-दुर्दिन, स्थूल-सूक्ष्म, आदि-अंत, आकर्षण-विकर्षण, आस्था-अनास्था, इष्ट-अनिष्ट, एकाधिकार-सर्वाधिकार, ओजस्वी-निस्तेज, कर्कश-मधुर, खगोल-भूगोल, गमन-आगमन, गौरव-लाघव, चंचल-स्थिर, छली-निष्कपट, जय-पराजय, तप्त-शीतल, दयालु-निर्दयी।
1. विलोम चुनते समय शब्द की व्याकरणिक कोटि (संज्ञा, विशेषण, क्रिया) का ध्यान रखें। 2. तत्सम शब्दों का विलोम तत्सम ही होता है। 3. यदि शब्द में उपसर्ग लगा है, तो विलोम में भी उसी प्रकार का उपसर्ग परिवर्तन देखें। 4. कठिन शब्दों के विलोम के लिए शब्द के अर्थ को समझें। 5. 'अ' या 'अन' उपसर्ग लगाकर भी नए विलोम बनाए जा सकते हैं।1. विलोम चुनते समय शब्द की व्याकरणिक कोटि (संज्ञा, विशेषण, क्रिया) का ध्यान रखें। 2. तत्सम शब्दों का विलोम तत्सम ही होता है। 3. यदि शब्द में उपसर्ग लगा है, तो विलोम में भी उसी प्रकार का उपसर्ग परिवर्तन देखें। 4. कठिन शब्दों के विलोम के लिए शब्द के अर्थ को समझें। 5. 'अ' या 'अन' उपसर्ग लगाकर भी नए विलोम बनाए जा सकते हैं।