UPSSSC लोअर मेन्स के लिए व्यंजन की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए व्यंजन की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| वर्ग | व्यंजन | संख्या |
|---|---|---|
| स्पर्श | क से म तक | 25 |
| अंतःस्थ | य, र, ल, व | 4 |
| ऊष्म | श, ष, स, ह | 4 |
| संयुक्त | क्ष, त्र, ज्ञ, श्र | 4 |
जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। इनके उच्चारण में हवा मुख के अलग-अलग भागों से टकराती है।जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। इनके उच्चारण में हवा मुख के अलग-अलग भागों से टकराती है।
जिनका उच्चारण करते समय जीभ मुख के विभिन्न स्थानों (कंठ, तालु, मूर्धा, दंत, ओष्ठ) को स्पर्श करती है। इन्हें पाँच वर्गों में बांटा गया है: क, च, ट, त, प वर्ग।जिनका उच्चारण करते समय जीभ मुख के विभिन्न स्थानों (कंठ, तालु, मूर्धा, दंत, ओष्ठ) को स्पर्श करती है। इन्हें पाँच वर्गों में बांटा गया है: क, च, ट, त, प वर्ग।
इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के मध्य का होता है। ये चार हैं: य, र, ल, व।इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के मध्य का होता है। ये चार हैं: य, र, ल, व।
इनके उच्चारण में मुख से गर्म हवा निकलती है। ये चार हैं: श, ष, स, ह।इनके उच्चारण में मुख से गर्म हवा निकलती है। ये चार हैं: श, ष, स, ह।
दो व्यंजनों के मेल से बने वर्ण। उदाहरण: क्ष (क्+ष), त्र (त्+र), ज्ञ (ज्+ञ), श्र (श्+र)।दो व्यंजनों के मेल से बने वर्ण। उदाहरण: क्ष (क्+ष), त्र (त्+र), ज्ञ (ज्+ञ), श्र (श्+र)।
ड और ढ के नीचे बिंदु (ड़, ढ़) लगाने से ये द्विगुण व्यंजन कहलाते हैं। इनका प्रयोग शब्द के शुरू में नहीं होता।ड और ढ के नीचे बिंदु (ड़, ढ़) लगाने से ये द्विगुण व्यंजन कहलाते हैं। इनका प्रयोग शब्द के शुरू में नहीं होता।
अघोष (प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण) और सघोष (प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवाँ वर्ण)।अघोष (प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण) और सघोष (प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवाँ वर्ण)।
अल्पप्राण (1, 3, 5 वर्ण) और महाप्राण (2, 4 वर्ण)।अल्पप्राण (1, 3, 5 वर्ण) और महाप्राण (2, 4 वर्ण)।
क वर्ग: क, ख, ग, घ, ङ | च वर्ग: च, छ, ज, झ, ञ | ट वर्ग: ट, ठ, ड, ढ, ण | त वर्ग: त, थ, द, ध, न | प वर्ग: प, फ, ब, भ, म | अंतःस्थ: य, र, ल, व | ऊष्म: श, ष, स, ह | संयुक्त: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र | अन्य: ड़, ढ़, ञ, ण, न, म, र, ल, व, श, स, ह, क, च, ट, त, प, ख, छ, ठ, थ, फ, ग, ज, ड, द, ब, घ, झ, ढ, ध, भ... (आदि)क वर्ग: क, ख, ग, घ, ङ | च वर्ग: च, छ, ज, झ, ञ | ट वर्ग: ट, ठ, ड, ढ, ण | त वर्ग: त, थ, द, ध, न | प वर्ग: प, फ, ब, भ, म | अंतःस्थ: य, र, ल, व | ऊष्म: श, ष, स, ह | संयुक्त: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र | अन्य: ड़, ढ़, ञ, ण, न, म, र, ल, व, श, स, ह, क, च, ट, त, प, ख, छ, ठ, थ, फ, ग, ज, ड, द, ब, घ, झ, ढ, ध, भ... (आदि)
1. 'ह' को काकल्य वर्ण कहते हैं। 2. 'ल' को पार्श्विक वर्ण कहते हैं। 3. 'र' को लुंठित या प्रकंपित वर्ण कहते हैं। 4. अघोष याद रखने का ट्रिक: '12' (वर्ग के पहले दो वर्ण)। 5. अल्पप्राण का ट्रिक: '135' (विषम संख्या)।1. 'ह' को काकल्य वर्ण कहते हैं। 2. 'ल' को पार्श्विक वर्ण कहते हैं। 3. 'र' को लुंठित या प्रकंपित वर्ण कहते हैं। 4. अघोष याद रखने का ट्रिक: '12' (वर्ग के पहले दो वर्ण)। 5. अल्पप्राण का ट्रिक: '135' (विषम संख्या)।