Exhaustive list of high-yield Hindi Synonyms (पर्यायवाची शब्द) categorized and simplified for UPSSSC PET exam.पर्यायवाची शब्द पर UPSSSC PET की विस्तृत गाइड।
| विषय/पहल (Aspect) | मुख्य विवरण (Key Details) |
|---|---|
| शाब्दिक अर्थ (Literal Meaning) | पर्याय (समान/एक जैसा) + वाच्य (बोला जाने वाला/अर्थ व्यक्त करने वाला)। इसका तात्पर्य 'समान अर्थ देने वाले शब्द' से है। |
| परिभाषा (Definition) | वे शब्द जो समान अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें पर्यायवाची (Paryayvachi Shabd) या समानार्थी (Synonyms) कहा जाता है। |
| प्रकार/भेद (Classifications) | 1. पूर्ण पर्याय (स्थान बदलने पर भी अर्थ समान रहता है) 2. अपूर्ण पर्याय (सूक्ष्म अर्थ-भेद होता है) 3. पूर्णापूर्ण पर्याय (प्रसंग विशेष पर निर्भर) |
| UPSSSC PET में महत्व | सामान्य हिन्दी खंड में 1 से 2 प्रश्न सीधे पर्यायवाची शब्द (Hindi Vocabulary) से पूछे जाते हैं। |
| सूक्ष्म अर्थ-भेद (Subtle Difference) | यद्यपि अर्थ समान होता है, परंतु प्रत्येक शब्द का प्रयोग संदर्भ अलग होता है (जैसे: जल की जगह हर स्थान पर पानी का प्रयोग सही नहीं बैठता)। |
| प्रत्यय-आधारित नियम (Suffix Rules) | ज (जन्म लेने वाला = कमल), द (देने वाला = बादल), धिर/धि (धारण करने वाला = समुद्र)। |
| तत्सम-तद्भव संबंध | अधिकतर पर्यायवाची शब्द संस्कृत (तत्सम) भाषा से लिए गए हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। |
| परीक्षा में पहचान कुंजी | विकल्पों को हल करते समय मूल शब्द के अर्थ और प्रत्यय के योग को पहचानना सबसे प्रभावी तकनीक है। |
• जल के मूल शब्द: जल, नीर, वारि, अम्बु, तोय, पय, उदक।
• सूर्य के पर्याय: दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, अर्क, अद्रि, मार्तण्ड, सविता, पतंग, तरणि।
• देवता: सुर, देव, अमर, निर्जर, त्रिदश, विबुध, गीर्वाण।
• पृथ्वी: भू, भूमि, धरा, धरित्री, वसुंधरा, वसुधा, मेदिनी, अवनि, उरवी, रसा।
• गंगा: भागीरथी, सुरसरि, देवनदी, मंदाकिनी, त्रिपथगा, विष्णुपदी, जान्हवी।
• पूर्ण पर्याय: जो शब्द हर प्रसंग में एक-दूसरे का स्थान ले सकें (जैसे: वस्त्र = कपड़ा = वसन)।
| मूल शब्द (Word) | वर्ग/श्रेणी (Category) | अति-महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द (Key Synonyms) | विशेष नियम / अर्थ-विच्छेद (Rule/Split) |
|---|---|---|---|
| अग्नि (Fire) | प्राकृतिक तत्व | अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशानु, वैश्वानर, हुताशन, शिखी | अन + अल (अनल) | 'अनिल' (वायु) से भ्रमित न हों। |
| अमृत (Nectar) | पौराणिक | सुधा, पीयूष, अमिय, सोम, सुरभोग, जीवनोदक | अ + मृत = जो कभी मरने न दे। |
| आँख (Eye) | शरीर का अंग | अक्षि, नयन, लोचन, चक्षु, दृग, विलोचन, प्रेक्षण | अक्षि (तत्सम) का तद्भव रूप 'आँख' है। |
| इच्छा (Desire) | मानसिक भाव | आकांक्षा, अभिलाषा, कामना, लालसा, स्पृहा, इहा, वांछा | स्पृहा एवं इहा कठिन तत्सम पर्याय हैं। |
| कपड़ा (Cloth) | दैनिक वस्तु | वस्त्र, वसन, पट, अंबर, चीर, परिधान | 'अंबर' का अर्थ कपड़ा एवं आकाश दोनों है। |
| कामदेव (Cupid) | पौराणिक | मदन, मनोभव, पंचशर, मार, स्मर, मीनकेतु, कंदर्प, अनंग | मन + भव = मन में उत्पन्न होने वाला। |
| कुबेर (God of Wealth) | पौराणिक | धनद, यक्षराज, धनेश्वर, किन्नरेश, राजराज, धनाधिप | धन + द = धन देने वाला देव। |
| चंद्रमा (Moon) | खगोलीय पिंड | शशांक, हिमांशु, सुधांशु, राकापति, द्विजराज, मयंक, सोम | शश (खरगोश) + अंक (गोद में चिन्ह)। |
| तरंग (Wave) | जल प्रपात/नदी | लहर, वीचि, उर्मी, हिलोर | 'वीचि' और 'उर्मी' बार-बार पूछे जाने वाले शब्द हैं। |
| तलवार (Sword) | अस्त्र-शस्त्र | असि, कृपाण, करवाल, खड्ग, चंद्रहास, शमशीर | चंद्रहास = रावण की तलवार का विशेष नाम। |
| पण्डित (Scholar) | व्यक्ति वर्ग | सुधी, विद्वान, कोविद, बुध, मनीषि, प्राज्ञ, धीर | कोविद, मनीषि, सुधी (क्लिष्ट शब्द)। |
| पवन/हवा (Wind) | प्राकृतिक तत्व | वायु, अनिल, समीर, मरुत, वात, प्रभंजन, समीरण | 'अनिल' (वायु) का 'अनल' (अग्नि) से अंतर रखें। |
| हाथी (Elephant) | पशु वर्ग | गज, द्विप, वारण, मातंग, कुंभी, हस्ती, दंती, करी | द्वि + प = दो बार जल पीने वाला। |
| सिंह/शेर (Lion) | पशु वर्ग | केसरी, शार्दूल, मृगेंद्र, वनराज, नाहर, पंचानन, हरि | मृग + इंद्र = पशुओं का राजा। |
| सोना (Gold) | धातु/द्रव्य | स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, हाटक, जात रूप, हिरण्य | हाटक एवं जातरूप UPSSSC PET के लिए प्रिय शब्द हैं। |
अनल (इ की मात्रा नहीं) = अग्नि (आग में कोई शांति/ठंडक नहीं होती)। अनिल ('इ' की मात्रा) = हवा/पवन (हवा में नमी/इ की मात्रा होती है)।
• तरणि (छोटी 'इ') = सूर्य (छोटा रूप)।
द्विज का अर्थ है 'दो बार जन्म लेने वाला' — यह ब्राह्मण (जन्म व यज्ञोपवीत), पक्षी (अंडा व बच्चा), दांत (दूध व स्थायी) और चंद्रमा चारों का पर्यायवाची है।
मूल शब्द के अंत में अरि/रिपु (शत्रु) जोड़ने पर नया अर्थ बनता है: देव + अरि = दैत्य/असुर, पन्नग (सर्प) + अरि = गरुड़ (पन्नगारि)।
सूर्य के किसी भी पर्यायवाची (भानु, अर्क, सूर्य, तरणि) में जा/सुता (पुत्री) जोड़ने पर यमुना का पर्यायवाची बन जाता है (उदा. अर्कजा, भानुजा, सूर्यसुता)।
पर्वत के पर्यायवाची (गिरि, शैल, नग, भूधर) के अंत में जा/सुता/नंदिनी लगाने से पार्वती बनता है (उदा. गिरिजा, शैलजा, नगजा)।
राका (पूर्णिमा) + पति = चंद्रमा; खग (पक्षी) + ईश = गरुड़ (खगेश); सुर (देव) + ईश = इंद्र (सुरेश)।
अक्सर छात्र अनल को पवन समझ लेते हैं, जबकि अनल = आग और अनिल = हवा होता है।
दंत्य 'सर' का अर्थ तालाब/सरोवर है, जबकि तालव्य 'शर' का अर्थ बाण/तीर होता है।
ह्रस्व 'अलि' (छोटी इ) = भौरा/भ्रमर। दीर्घ 'अली' (बड़ी ई) = सखी/सहेली। परीक्षा में विकल्प बहुत ध्यान से चुनें।
मार्तण्ड का अर्थ सूर्य होता है, जबकि मातंग का अर्थ हाथी होता है।
कृशानु = अग्नि, जबकि कृषक = किसान।
हर स्थान पर शब्द नहीं बदला जा सकता। 'पूजा का जल' कहना शुद्ध है, लेकिन 'पूजा का पानी' बोलना संदर्भहीन और अशुद्ध माना जाता है।
अंबर शब्द आकाश और कपड़ा/वस्त्र दोनों का पर्यायवाची है। प्रश्न के प्रसंग के अनुसार ही सही विकल्प चुनें।
समान अर्थ प्रकट करने वाले शब्दों को पर्यायवाची (Synonyms) या समानार्थी कहते हैं।
जल + ज = कमल; जल + द = बादल; जल + धि = समुद्र।
दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, अर्क, सविता, पतंग, मार्तण्ड, तरणि।
शशांक, हिमांशु, सुधांशु, सोम, मयंक, द्विजराज, राकापति।
भागीरथी, सुरसरि, देवनदी, मंदाकिनी, त्रिपथगा, विष्णुपदी, जान्हवी।
कालिंदी, अर्कजा, सूर्यसुता, भानुजा, तरणिजा, कृष्णा।
अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशानु, वैश्वानर, हुताशन।
अनिल, पवन, समीर, मरुत, वात, प्रभंजन, समीरण।
सुरेश, देवराज, मघवा, शक्र, पुरंदर, सहस्राक्ष, वासव।
मदन, मनोभव, पंचशर, मार, स्मर, कंदर्प, अनंग, मीनकेतु।
सुधी, विद्वान, कोविद, बुध, मनीषि, प्राज्ञ।
भुजंग, व्याल, अहि, उरग, विषधर, पवनाशन, नाग।
गज, द्विप, वारण, मातंग, कुंभी, हस्ती, करी।
स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, हाटक, जातरूप, हिरण्य।
परीक्षा रणनीति (Tip): UPSSSC PET में जब भी अनजाना पर्यायवाची दिखे, शब्द के अंत में लगे प्रत्यय (ज, द, धि, जा, धर, अरि) का विच्छेद करके अर्थ निकालें। इससे 80% कठिन प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।
परीक्षक का जाल (Trap): परीक्षा में 'अग्नि' का पर्यायवाची पूछकर विकल्पों में 'अनिल' दिया जाता है और 'वायु' पूछकर 'अनल' दिया जाता है। छात्र उतावलेपन में 'इ' की मात्रा पर ध्यान नहीं देते और अंक गंवा बैठते हैं।
परीक्षक का जाल (Trap): तरणि (सूर्य) तथा तरणी (नौका) के बीच मात्राओं का सूक्ष्म फेरबदल करके भ्रमित किया जाता है। याद रखें: छोटी 'इ' = सूर्य (छोटा), बड़ी 'ई' = नाव (बड़ी)।
परीक्षा रणनीति (Tip): 'द्विज', 'अंबर', 'हरि', 'अरि' जैसे अनेकार्थी शब्दों के पर्यायवाची संबंधों को विशेष रूप से याद रखें, क्योंकि PET परीक्षा में बहु-अर्थी पर्याय बहुतायत में पूछे जाते हैं।
परीक्षक का जाल (Trap): मार्तण्ड (सूर्य) और मातंग (हाथी), तथा कृशानु (अग्नि) और कृषक (किसान) में जानबूझकर समान ध्वनि का फायदा उठाकर गलत विकल्प बनाया जाता है।