Detailed study guide of famous Hindi authors, poets, and their classic literary works (लेखक और रचनायें - गद्य एवं पद्य) for UPSSSC PET.लेखक और रचनायें (गद्य एवं पद्य) पर UPSSSC PET की विस्तृत गाइड।
| विषय/पहल (Aspect) | मुख्य विवरण (Key Details) |
|---|---|
| परिभाषा एवं परिचय (Definition & Intro) | हिन्दी साहित्य में गद्य (Prose) और पद्य (Poetry) के कालजयी रचयिताओं तथा उनकी प्रमुख कृतियों का अध्ययन UPSSSC PET परीक्षा का अनिवार्य अंग है। |
| काल विभाजन (Periodization) | हिन्दी साहित्य को मुख्यतः 4 कालों में विभाजित किया गया है: आदिकाल (वीरगाथा काल), भक्तिकाल (स्वर्ण काल), रीतिकाल, एवं आधुनिक काल। |
| पद्य साहित्य (Poetry Stream) | पद्य साहित्य के अंतर्गत महाकाव्य, खंडकाव्य, मुक्तक एवं गीति काव्य आते हैं; जैसे - रामचरितमानस (तुलसीदास) व कामायनी (जयशंकर प्रसाद)। |
| गद्य साहित्य (Prose Stream) | गद्य साहित्य में उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, जीवनी, आत्मकथा, संस्मरण एवं रेखाचित्र शामिल हैं; प्रवर्तक - भारतेन्दु हरिश्चंद्र व मुंशी प्रेमचंद। |
| PET परीक्षा भार (PET Weightage) | सामान्य हिन्दी खंड के अंतर्गत 2 से 3 प्रश्न सीधे लेखक, रचनाओं, उपनामों एवं पुरस्कार विजेता पुस्तकों पर आधारित होते हैं। |
| प्रमुख पुरस्कार (Major Awards) | ज्ञानपीठ पुरस्कार (जैसे - चिदंबरा, यामा) और साहित्य अकादमी पुरस्कार (जैसे - हिम तरंगिणी) प्राप्त रचनाएं सर्वाधिक पूछी जाती हैं। |
| महत्वपूर्ण उपनाम (Famous Pen Names) | कवियों के उपनाम परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं; जैसे- 'निराला' (सूर्यकांत त्रिपाठी), 'दिनकर' (रामधारी सिंह), 'अज्ञेय' (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)। |
| भक्तिकाल का वर्गीकरण (Bhaktikal Branches) | भक्तिकाल दो धाराओं में बंटा है: निर्गुण (ज्ञानाश्रयी - कबीर; प्रेमाश्रयी - जायसी) तथा सगुण (रामाश्रयी - तुलसी; कृष्णाश्रयी - सूरदास)। |
• आदिकाल (वीरगाथा काल): चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो - हिन्दी का प्रथम महाकाव्य), दलपति विजय (खुमाण रासो), जगनिक (परमाल रासो / आल्हाखंड), नरपति नाल्ह (बीसलदेव रासो), अमीर खुसरो (पहेलियां एवं मुकरियां), विद्यापति (कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पदावली)।
• रीतिबद्ध धारा: केशवदास (रामचंद्रिका, कविप्रिया, रसिकप्रिया - इन्हें 'कठिन काव्य का प्रेत' कहा जाता है), मतिराम (रसराज, ललित ललाम), चिंतामणि (कविकुल कल्पतरु)।
• जयशंकर प्रसाद (छायावाद के जनक): कामायनी (महाकाव्य), आंसू, लहर, झरना, कानन कुसुम; नाटक - चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी; उपन्यास - कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण)।
• मुंशी प्रेमचंद (उपन्यास सम्राट): उपन्यास - गोदान, गबन, सेवा सदन, रंगभूमि, कर्मभूमि, निर्मला, कायाकल्प, प्रेमाश्रम, मंगलसूत्र (अपूर्ण); कहानियां - पूस की रात, ईदगाह, कफन, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी।
• भारतेन्दु हरिश्चंद्र (आधुनिक हिन्दी के पितामह): भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, सत्य हरिश्चंद्र, चंद्रावली, कर्पूर मंजरी।
| कवि/लेखक (Author) | प्रमुख रचनाएं (Major Works) | विधा / विशेष तथ्य (Genre/Key Detail) |
|---|---|---|
| चंदबरदाई | पृथ्वीराज रासो | पद्य महाकाव्य (हिन्दी का प्रथम महाकाव्य) |
| गोस्वामी तुलसीदास | रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली | सगुण भक्ति काव्य (अवधी व ब्रज भाषा) |
| सूरदास | सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी | अष्टछाप के जहाज (ब्रजभाषा भक्ति काव्य) |
| मलिक मोहम्मद जायसी | पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम | सूफी प्रेमाख्यानक काव्य (अवधी भाषा) |
| बिहारीलाल | बिहारी सतसई (713 दोहे) | रीतिसिद्ध काव्य ('गागर में सागर') |
| जयशंकर प्रसाद | कामायनी, आंसू, चंद्रगुप्त, गोदान नहीं (तितली) | छायावादी महाकाव्य एवं ऐतिहासिक नाटक |
| सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | अनामिका, कुकुरमुत्ता, राम की शक्ति पूजा | मुक्त छंद के प्रवर्तक कवि |
| सुमित्रानंदन पंत | चिदंबरा, पल्लव, वीणा, लोकायतन | प्रकृति के सुकुमार कवि (ज्ञानपीठ 1968) |
| महादेवी वर्मा | यामा, नीहार, अतीत के चलचित्र | आधुनिक मीरा (ज्ञानपीठ 1982) |
| मुंशी प्रेमचंद | गोदान, गबन, निर्मला, कफन, पूस की रात | उपन्यास सम्राट एवं श्रेष्ठ कहानीकार |
| लाला श्रीनिवास दास | परीक्षा गुरु | हिन्दी का प्रथम उपन्यास (1882) |
| अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' | प्रियप्रवास, वैदेही वनवास | खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य |
| मैथिलीशरण गुप्त | साकेत, भारत-भारती, यशोधरा | प्रथम राष्ट्रकवि (द्विवेदी युग) |
| रामधारी सिंह 'दिनकर' | उर्वशी, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, हुंकार | ओज के राष्ट्रकवि (ज्ञानपीठ 1972) |
| माखनलाल चतुर्वेदी | हिम तरंगिणी, हिम किरीटिनी, पुष्प की अभिलाषा | एक भारतीय आत्मा (साहित्य अकादमी 1955) |
| हरिवंश राय 'बच्चन' | मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, क्या भूलूं क्या याद करूं | हालावाद के प्रवर्तक एवं आत्मकथाकार |
| सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' | कितनी नावों में कितनी बार, आंगन के पार द्वार | प्रयोगवाद/तारसप्तक के संपादक |
| आचार्य रामचंद्र शुक्ल | चिंतामणि, हिन्दी साहित्य का इतिहास | हिन्दी के शीर्ष आलोचक एवं निबंधकार |
| हजारी प्रसाद द्विवेदी | बाणभट्ट की आत्मकथा, कुटज, अशोक के फूल | ऐतिहासिक उपन्यासकार व निबंधकार |
| फणीश्वर नाथ 'रेणु' | मैला आंचल, परती परिकथा, मारे गए गुलफाम | प्रथम प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यासकार |
| मोहन राकेश | आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस | प्रसिद्ध आधुनिक नाटककार |
| धर्मवीर भारती | गुनाहों का देवता, अंधा युग, सूरज का सातवां घोड़ा | प्रतिष्ठित उपन्यासकार व गीतिनाट्यकार |
ट्रिक: "जय सूर्य सुमित्रा महा" -> जय (जयशंकर प्रसाद), सूर्य (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला), सुमित्रा (सुमित्रानंदन पंत), महा (महादेवी वर्मा)।
ट्रिक: "सेवा प्रेमा रंग काया, निर्मला की गोदान माया" -> सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान।
ट्रिक: "अजात का स्कंद, चंद्र की ध्रुवस्वामिनी" -> अजातशत्रु, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी।
ट्रिक: "सिद्ध बिहारी, बद्ध केशव, मुक्त घनानंद" -> रीतिसिद्ध = बिहारी, रीतिबद्ध = केशवदास, रीतिमुक्त = घनानंद।
ट्रिक: "उर्वशी ने कुरुक्षेत्र में रश्मिरथी को हुंकार दी" -> उर्वशी, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, हुंकार।
ट्रिक: "चिदंबरा में उर्वशी ने कितनी नावों में यामा देखी" -> चिदंबरा (पंत - 1968), उर्वशी (दिनकर - 1972), कितनी नावों में कितनी बार (अज्ञेय - 1978), यामा (महादेवी - 1982)।
अक्सर छात्र इसे आत्मकथा चुन लेते हैं। सही उत्तर उपन्यास है, जिसे हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है।
यह मुंशी प्रेमचंद की जीवनी है, परंतु इसके लेखक उनके पुत्र अमृत राय हैं, न कि प्रेमचंद स्वयं।
'उर्वशी' नाम से जयशंकर प्रसाद (चंपू काव्य) और दिनकर (काव्य नाटक) दोनों ने लिखा है; ज्ञानपीठ पुरस्कार रामधारी सिंह 'दिनकर' को मिला था।
'गोदान' प्रसिद्ध उपन्यास है परंतु हिन्दी का प्रथम सर्वमान्य उपन्यास 'परीक्षा गुरु' (लाला श्रीनिवास दास, 1882) है।
साकेत (मैथिलीशरण गुप्त) द्विवेदी युग की रचना है, जबकि कामायनी (जयशंकर प्रसाद) छायावादी युग का महाकाव्य है।
'अज्ञेय' का पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन है तथा 'निराला' का पूरा नाम सूर्यकांत त्रिपाठी है।
'उदन्त मार्तण्ड' (1826) - संपादक: पंडित जुगल किशोर शुक्ल (कोलकाता)।
'पृथ्वीराज रासो' - रचयिता: चंदबरदाई (आदिकाल)।
'प्रियप्रवास' - रचयिता: अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'।
मैथिलीशरण गुप्त - प्रसिद्ध कृति: 'भारत-भारती' (1912)।
1955 में माखनलाल चतुर्वेदी को 'हिम तरंगिणी' काव्य कृति हेतु।
1968 में सुमित्रानंदन पंत को 'चिदंबरा' काव्य संग्रह हेतु।
1982 में महादेवी वर्मा को 'यामा' काव्य संग्रह हेतु।
केशवदास - क्लिष्ट भाषा एवं कठिन छंद विधान के कारण।
सूरदास - वल्लभाचार्य के प्रमुख शिष्य व कृष्ण भक्ति कवि।
'इन्दुमती' (1900) - लेखक: किसोरीलाल गोस्वामी।
'नहुष' - लेखक: गोपालचंद्र 'गिरिधरदास' (भारतेन्दु जी के पिता)।
'मैला आंचल' (1954) - लेखक: फणीश्वर नाथ 'रेणु'।
UPSSSC PET परीक्षा हेतु जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत और सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की सभी रचनाएं सर्वोच्च प्राथमिकता पर याद करें।
'बाणभट्ट की आत्मकथा' (उपन्यास) तथा 'कलम का सिपाही' (अमृत राय द्वारा प्रेमचंद की जीवनी) की विधा व लेखक में परीक्षक अक्सर विकल्प बदलकर फंसाता है।
ज्ञानपीठ एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों की तालिका से प्रतिवर्ष 1-2 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं, इन्हें वर्ष एवं लेखक सहित याद रखें।
'उर्वशी' काव्य नाटक के लिए ज्ञानपीठ रामधारी सिंह 'दिनकर' को मिला था; विकल्प में जयशंकर प्रसाद देखकर भ्रमित न हों।