Sandhi (Joinings)संधि

Detailed concepts of Hindi Sandhi (Svara, Vyanjana, and Visarga Sandhi) rules, exceptions, and practice examples for UPSSSC PET.संधि पर UPSSSC PET की विस्तृत गाइड।

Mediumमध्यम 45 min totalकुल 45 मिनट

Detailed Brief Overview

विषय/पहलू (Aspect)मुख्य विवरण (Key Details)
परिभाषा (Definition)दो समीपवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से होने वाले विकार (ध्वनि परिवर्तन) को संधि (Sandhi) कहते हैं। (उदा. देव + आलय = देवालय)
संधि-विच्छेद (Sandhi Vicchhed)संधि द्वारा बने नए शब्द को पुनः उसके मूल दो पदों में पृथक करने की प्रक्रिया संधि-विच्छेद कहलाती है। (उदा. परीक्षार्थी = परीक्षा + अर्थी)
संधि के मुख्य भेद (Main Types)संधि के 3 मुख्य भेद होते हैं: 1. स्वर संधि (Svara Sandhi) 2. व्यंजन संधि (Vyanjana Sandhi) 3. विसर्ग संधि (Visarga Sandhi)
स्वर संधि के भेद (Types of Svara Sandhi)दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकार। इसके 5 उप-भेद हैं: • दीर्घ (आ, ई, ऊ) • गुण (ए, ओ, अर्) • वृद्धि (ऐ, औ) • यण् (य, व, र) • अयादि (अय, आय, अव, आव)
व्यंजन संधि पहचान (Vyanjana Sandhi)व्यंजन वर्ण के बाद स्वर या व्यंजन आने से जो परिवर्तन होता है। (उदा. उत् + लास = उल्लास, दिक् + गज = दिग्गज)
विसर्ग संधि पहचान (Visarga Sandhi)विसर्ग () के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो विकार उत्पन्न होता है। (उदा. निः + आहार = निराहार, नमः + ते = नमस्ते)
UPSSSC PET परीक्षा महत्वPET पाठ्यक्रम के सामान्य हिन्दी (General Hindi) भाग में संधि से 1-2 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
मुख्य पहचान सूत्र (Quick Formula)1 मात्रा (े, ो) = गुण संधि • 2 मात्राएँ (ै, ौ) = वृद्धि संधि • आधा वर्ण + य, व, र = यण् संधि • 3 अक्षरों का सरल शब्द = अयादि संधि

Detailed Explanation with Mnemonics

1. दीर्घ स्वर संधि (Svara Sandhi - Dirgha) - [सूत्र: अकः सवर्णे दीर्घः]

नियम: जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद समान स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ (आ, ई, ऊ) हो जाते हैं।

अ/आ + अ/आ = आ: धर्म + अर्थ = धर्मार्थ, हिम + आलय = हिमालय, विद्या + अर्थी = विद्यार्थी, महा + आत्मा = महात्मा
इ/ई + इ/ई = ई: कवि + इंद्र = कवींद्र, गिरि + ईश = गिरीश, मही + इंद्र = महेंद्र, नदी + ईश = नदीश
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ: भानु + उदय = भानूदय, लघु + ऊर्मि = लघूर्मि, वधू + उत्सव = वधोत्सव, भू + ऊर्जा = भूर्जा
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "समान स्वर मिले तो परिणाम हमेशा बड़ा (दीर्घ: आ, ई, ऊ) ही होगा।"

2. गुण स्वर संधि (Guna Sandhi) - [सूत्र: आद्गुणः]

नियम: अ/आ के बाद यदि इ/ई, उ/ऊ, ऋ आए, तो वे क्रमशः 'ए', 'ओ', 'अर्' बन जाते हैं।

अ/आ + इ/ई = ए: नर + इंद्र = नरेंद्र, देव + ईश = देवेश, महा + इंद्र = महेंद्र, महा + ईश्वर = महेश्वर
अ/आ + उ/ऊ = ओ: ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश, जल + ऊर्मि = जलोर्मि, महा + उत्सव = महोत्सव, महा + ऊरु = महोुरु
अ/आ + ऋ = अर्: देव + ऋषि = देवर्षि, महा + ऋषि = महर्षि, सप्त + ऋषि = सप्तर्षि
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "एक मात्रा (े, ो) या सिर पर रेफ (र्) = गुण संधि की पहचान।"

3. वृद्धि स्वर संधि (Vriddhi Sandhi) - [सूत्र: वृद्धिरेचि]

नियम: अ/आ के बाद यदि ए/ऐ आए तो 'ऐ' और ओ/औ आए तो 'औ' बनता है।

अ/आ + ए/ऐ = ऐ: एक + एक = एकैक, मत + ऐक्य = मतैक्य, सदा + एव = सदैव, महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
अ/आ + ओ/औ = औ: वन + औषधि = वनौषधि, परम + औषध = परमौषध, महा + ओज = महौज, महा + औदार्य = महौदार्य
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "गुण में एक मात्रा जुड़ी तो 'वृद्धि' हुई, यानी दो मात्राएँ (ै, ौ)।"

4. यण् स्वर संधि (Yan Sandhi) - [सूत्र: इको यणचि]

नियम: इ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद कोई भी असमान (भिन्न) स्वर आए तो इ/ई → य्, उ/ऊ → व्, ऋ → र् हो जाता है।

इ/ई + असमान स्वर = य्: अति + अधिक = अत्यधिक, इति + आदि = इत्यादि, प्रति + उपकार = प्रत्युपकार, देवी + आगमन = देव्यागमन
उ/ऊ + असमान स्वर = व्: सु + आगत = स्वागत, अनु + एषण = अन्वेषण, मधु + अरि = मध्वरि
ऋ + असमान स्वर = र्: पितृ + अनुमति = पित्रनुमति, मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "य, व, र से ठीक पहले आधा व्यंजन (स्वररहित वर्ण) आए तो 100% यण् संधि।"

5. अयादि स्वर संधि (Ayadi Sandhi) - [सूत्र: एचोऽयवायावः]

नियम: ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो: ए → अय्, ऐ → आय्, ओ → अव्, औ → आव्

ए + स्वर = अय्: ने + अन = नयन, शे + अन = शयन
ऐ + स्वर = आय्: नै + अक = नायक, गै + अक = गायक
ओ + स्वर = अव्: पो + अन = पवन, भो + अन = भवन
औ + स्वर = आव्: पौ + अक = पावक, नौ + इक = नाविक, भौ + उक = भावुक
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "3 अक्षरों का सरल शब्द + य/व पूरा (बिना आधे अक्षर के) = अयादि संधि।"

6. व्यंजन संधि के मुख्य नियम (Vyanjana Sandhi Rules)

नियम 1 (1st से 3rd वर्ण): क, च, ट, त, प + स्वर/घोष व्यंजन = ग, ज, ड, द, ब (उदा. दिक् + गज = दिग्गज, वाक् + ईश = वागीश, अच् + अंत = अजंत, सत् + धर्म = सद्धर्म)

नियम 2 (1st से 5th वर्ण): क, च, ट, त, प + न/म = ङ, ञ, ण, न, म (उदा. वाक् + मय = वाङ्ग्मय/वाङ्मय, उत् + नति = उन्नति, जगत् + नाथ = जगन्नाथ)
नियम 3 (त् संबंधी नियम): त् + ल = ल्ल (उत् + लास = उल्लास), त् + च = च्च (उत् + चारण = उच्चारण), त् + ज = ज्ज (सत् + जन = सज्जन)
नियम 4 (छ् संबंधी नियम): स्वर + छ = च्छ (उदा. अनु + छेद = अनुच्छेद, स्व + छंद = स्वच्छंद)
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "प्रथम वर्ण का तीसरे (1-3) या पाँचवे (1-5) वर्ण में परिवर्तन = व्यंजन संधि।"

7. विसर्ग संधि के मुख्य नियम (Visarga Sandhi Rules)

नियम 1 (विसर्ग का 'ओ' होना): अ + ः + घोष व्यंजन = (उदा. मनः + हर = मनोहर, तपः + बल = तपोबल, यशः + दा = यशोदा)

नियम 2 (विसर्ग का 'र्' होना): (अ/आ से भिन्न स्वर) + ः + स्वर/घोष = र् (उदा. निः + धन = निर्धन, निः + आशा = निराशा, दुः + बल = दुर्बल)
नियम 3 (विसर्ग का 'श्', 'ष्', 'स्' होना): ः + च/छ = श् (निः + छल = निश्छल), ः + ट/ठ = ष् (धनुः + टंकार = धनुष्टंकार), ः + त/थ = स् (नमः + ते = नमस्ते)
याद रखने की शार्ट-ट्रिक: "विसर्ग (ः) बदलकर 'ओ', 'र्' या आधा श्/ष्/स् में परिवर्तित हो जाता है।"

Comprehensive Data Tables

मूल संधि पद (Word)संधि विच्छेद (Splitting)संधि का मुख्य भेदलागू नियम व व्याख्या (Applied Rule)
देवालयदेव + आलयस्वर संधि (दीर्घ)अ + आ = (दीर्घीकरण)
कवींद्रकवि + इंद्रस्वर संधि (दीर्घ)इ + इ = (दीर्घ स्वर)
महोत्सवमहा + उत्सवस्वर संधि (गुण)आ + उ = (गुण विकार)
देवर्षिदेव + ऋषिस्वर संधि (गुण)अ + ऋ = अर्
सदैवसदा + एवस्वर संधि (वृद्धि)आ + ए = (वृद्धि विकार)
महौषधिमहा + औषधिस्वर संधि (वृद्धि)आ + ओ =
अत्यधिकअति + अधिकस्वर संधि (यण्)इ + अ = (इ का य् होना)
स्वागतसु + आगतस्वर संधि (यण्)उ + आ = वा (उ का व् होना)
पावकपौ + अकस्वर संधि (अयादि)औ + अ = आव (औ का आव् होना)
दिग्गजदिक् + गजव्यंजन संधिक (1st वर्ण) + ग = (1st to 3rd)
जगन्नाथजगत् + नाथव्यंजन संधित (1st वर्ण) + न (अनुनासिक) = (1st to 5th)
उल्लासउत् + लासव्यंजन संधित + ल = ल्ल (त्-संबंधी परिवर्तन)
अनुच्छेदअनु + छेदव्यंजन संधिस्वर + छ = च्छ (च का आगम)
मनोहरमनः + हरविसर्ग संधिअ + ः + घोष =
निर्धननिः + धनविसर्ग संधिः + घोष = र् (रेफ बन जाता है)
नमस्तेनमः + तेविसर्ग संधिः + त = स् (दंत्य सकार)
अक्षौहिणी (अपवाद)अक्ष + ऊहिनीस्वर संधि (अपवाद)अ + ऊ मिलकर गुण 'ओ' न होकर 'औ' (वृद्धि) बनता है
मार्तंड (अपवाद)मार्त + अंडस्वर संधि (अपवाद)अ + अ मिलकर दीर्घ 'आ' न होकर 'अ' (पररूप) रहता है

Tricks to Remember

Mistakes to Avoid

Point-wise Detailed Summary

UPSC Notes & InsightsUPSC नोट्स और अंतर्दृष्टि

परीक्षा रणनीति: UPSSSC PET में संधि का प्रश्न हल करते समय सबसे पहले शब्द को दो सार्थक (Meaningful) शब्दों में तोड़े। यदि तोड़े गए दोनों शब्दों का स्वतंत्र अर्थ नहीं है, तो वह संधि-विच्छेद गलत होगा।

परीक्षक का जाल (Trap): विकल्पों में 'मनोहर' या 'तपोवन' देकर 'गुण संधि' और 'विसर्ग संधि' दोनों विकल्प दिए जाते हैं। छात्र 'ओ' की मात्रा देखकर गुण संधि चुन लेते हैं, जबकि सही उत्तर विसर्ग संधि (मनः + हर, तपः + वन) होता है।

स्मार्ट एलिमिनेशन ट्रिक: यदि शब्द में 'य' या 'व' से पहले आधा अक्षर दिखे तो विकल्प में सीधे 'यण् संधि' ढूँढें। जैसे- 'अत्यधिक' (त+य), 'अन्वेषण' (न+व)।

परीक्षक का जाल (Trap): 'एकैक' के विच्छेद में विकल्प (A) 'एक + ऐक' और (B) 'एक + एक' दोनों दिए जाते हैं। सही उत्तर 'एक + एक' है, क्योंकि 'ऐक' कोई स्वतंत्र मानक शब्द नहीं है।

व्यंजन संधि हलंत जाँच: व्यंजन संधि वाले विकल्पों की पहचान करते समय ध्यान दें कि प्रथम पद का अंतिम वर्ण हलंत (्) के साथ होना चाहिए (जैसे- सत् + जन = सज्जन)।

Key Takeawaysमुख्य बातें